November 29, 2010

अधूरी तमन्ना (कहानी)

राज एक पन्द्रह वर्ष का लड़का था वह एक गरीब घर से वास्ता रखता था। वह हमेशा किताबो मे ही खोया रहता था। उसके इसी व्यवहार से उसका कोई दोस्त भी नही था वह अकेले ही बैठ कर सोचता रहता था कि एक दिन बिजनिस मैन बनूंगा और अपनी मां का नाम रोशन करूंगा। वह अपनी मॉ से यह बात कहता तो उसकी मां कहती इसके लिये पैसा चाहिये और जब तू पढ़ाई करेगा तो तुझे अच्छी नौकरी मिलेगी फिर तू अपना बिजनिस कर सकता है। यही सोचकर वह पढाई पर पूरा ध्यान देता था। वह दिन भी जल्दी आ गया जब राज ने हाईस्कूल की परीक्षा दी।
राज अकेले मे बैठा हुआ सोच रहा था, अब तो मैने हाईस्कूल की परीक्षा भी दे दी है मुझे कुछ काम करके अपने पैरो पर खड़ा होना चाहिये। यही सोच कर राज अपने पिताजी के दोस्त देवराज के पास गया और उन्हे अपनी जिज्ञासा बताई। उन्होने पहले तो उपर से नीचे तक राज को देखा फिर सोच कर बोले ‘अरे लौण्डे तू के काम करेगा? थारे तो दूध के दात भी ना टुटे।
अंकल मै कुछ भी कर लंूगा आप को तो पता है मेरे पिता जी का र्स्वगवास तो बचपन मे ही हो गया, मै चाहता हूॅ कि अपने पेरो पर खडा होकर अपनी मां को घर पर बिठाना चाहता हूॅ। अंकल अब सीरियस होकर बोले काम तो मै तुझे दिलवा दूंगा और पिफर सोच कर बोले ‘तू होटल मे काम कर लेगा।
तुरंत ही राज ने कहा हॉ अंकल जी कर लूंगा।
ठीक है कल सुबह सफेद कमीज काली पैंट पहन कर मेरे घर पर आ जाना तुझे अपने साथ ही काम पर लगा लूंगा।
राज खुश होकर अपने घर आ गया और अपनी मॉ को बताया कि देवराज अंकल ने उसे काम दिला दिया है और कल से काम पर जाऐगा। पहले दिन काम पर जाने के सपने देखते-2 सो गया।
अगले दिन राज जल्दी से कपडे पहन कर अंकल के घर पर पहुॅच गया और खुश भी हो रहा था क्योकि आज उसके काम का पहला दिन जो है।
राज और उसके अंकल सीधे होटल पहुचते जहॉ उसके अंकल देवराज काम करते थे। उन्होने अपने मैनेजर से राज को मिलवाया। राज ने मैनेजर को नमस्ते की और मैनेजर ने देवराज से कहा, अरे देवराज यह तो बहुुत छोटा है यह क्या..............
अंकल ने उनकी बात काटते हुऐ कहा, अपना ही लड़का है इसे हैल्परी मे लगा देंगे।
चलो ठीक है देख लो।
उसके बाद अंकल ने राज को काम समझाया और उसे काम करने के लिये दुसरे हॉल मे भेज दिया। वहंा का स्टाफ और होटल मालिक भी राज की मेहनत को देखकर खुश थे। एक महिने बाद राज को उसके काम के रूप मे 800 रूपये मिले जिसे देखकर वो खुशी से फूल नही समा रहा था और घर जाकर अपनी मॉ को दिये उसकी मॉ भी खुशी से अपने बच्चे को देख रही थी। इसी तरह दिन अच्छे गुजर रहे थे। कुछ दिनो बाद राज का हाईस्कूल का रिजल्ट आ गया जिसमे वह फर्स्ट डिवीजन से पास था। अगले दिन राज का अखबार मे भी फोटो भी छपा था। जब होटल मालिक को यह बात पता लगी तो उसने राज को अपने आफिस मे बुलवाया और उसे अपने पास बिठाकर कहा, बेटा हमे बहुत खुशी है क्या तुम ओर आगे पढ़ना चाहते हो। उनके जवाब मे राज ने हॉ कहा। फिर उन्होने अपनी बात को आगे बढ़ाते हुए कहा, सारी किताबो और तुम्हारे स्कूल के खर्चे हम देगे। तुम सिर्फ पढ़ाई मे ध्यान दो और पॉच सौ का नोट राज के हाथ मे देते हुए कहा इसकी मिठाई लेकर खाना। राज ने थैक्यू कहा और आफिस से बाहर आ गया।
राज काम करने जा ही रहा था तभी मैनेजर के पास से राज बुलावा आ गया। राज अब मैनेजर के सामने खड़ा था। मैनेजर ने उसका कन्धा थपथपाया और कहा, शाबास इसी तरह से पढ़ाई मे ध्यान लगाओ। मैनेजर ने भी सौ रूपये का नोट राज के मना करने पर भी जबरदसती जेब मे डाल दिया लिया। राज आज बहुत खुश था और राज के पास हाने की खुशी मे होटल मालिक की ओर से स्टाफ के लिये आज स्पेशल भोजन का इंतजाम किया गया था। राज ने यह सब वाकया अपनी मॉ को बताया तो उसकी मॉ बहुत खुश हुई और आर्शिवाद देते हुऐ कहा कि खुब मन लगाकर पढ़ाई मे ध्यान दो। अब उसने निर्णय लिया कि जब उसे इतनी सहायता मिल रही है तो उसे पढ़ाई करनी चाहिए।
कुछ दिन बाद स्कूल खुल गये और राज ने दुबारा पढ़ाई के लिये दाखिला ले लिया और पार्ट टाईम नौकरी भी करता लेकिन साइंस स्ट्रीम होने के कारण उसे पार्ट टाईम नौकरी भी छोड़नी पड़ी। कुछ महिने सब कुछ ठीक चलता रहा लेकिन किस्मत का लिखा कौन मिटा सकता है उसके घर की आर्थिक स्थिति खराब हो गयी तो उसे पढ़ाई छोड़नी पडी। राज का मन दुबारा उस होटल मे काम करने की इजाजत नही दे रहा था क्योकि वह सोच रहा था कि उन्होने इतनी सहायता की और मै पढ़ाई छोड़ चुका हूॅ। किस मुह से उनके सामने जाउंगा। यही सोचकर वह काम की तलाश मे घूमता रहा उसे तो यह ही पता नही था कि काम कैसे मिलता है। वह खाली हाथ घर आ गया।
अगले दिन उसकी गली मे रहने वाले एक लड़के ने उसे दुसरे होटल पर लगवा दिया। उस होटल मे इश्तेफाक से एक वेटर उसके पिताजी का जानकार मिल गया और उसने राज को पहचान लिया लेकिन राज ने उसे नही पहचाना। उसने राज को अपने पास बुलाया और कहा, बेटा इधर आओ किस काम के लिये आये हो।
राज ने कहा, हैल्पर के लिये।
तेरे बाप का क्या नाम है?
रमेश।
अरे तू इतना बडा हो गया। तू मुझे जानता है।
नही, आपको मै पहली बार देख रहा हूॅ।
जानेगा कैसे जब मै तेरे घर आता था जब तो तू बहुत छोटा था। इससे पहले कभी काम किया है।
हॉ, इससे पहले एक होटल मे हैल्पर का काम किया है।
ठीक है, जब मालिक बुलाऐगा तो उससे कहना कि मैने वेटर का काम किया हुआ है। बाकी मै देख लूगा।
मालिक ने राज को बुलाया और पूछा इससे पहले कुछ काम किया है?
जी हॉ, वेटर का काम किया है।
कितने दिन?
जी, एक साल किया था।
कुछ बाते पूछकर उसने राज को 1300 रूपये माह पर काम पर रख लिया। धीरे-2 राज ने काम को अपने पिताजी के दोस्त से सीखकर एक अच्छा वेटर बन गया। राज की आदत को देखकर अब तो जो ग्राहक आता था वो राज को ही बुलाता था जिससे हेाटल मालिक की नजरो मे राज की इज्जत बढ गई। मेहनत के बलबुते से वह सीनीयर वेटर बन गया। एक दिन उसका एक सहपाठी राहुल मिल गया पिफर दोनो पुरानी बातो मे मशगुल हो गये।
यार राज तुने पढ़ाई क्यो छोड़ी?
बस यार कुछ समस्याऐ आ गई थी। अब सोच रहा हूॅ कि इन्टर प्राईवेट कर लू।
हॉ, विचार तो ठीक है लेकिन तू साथ मे कम्पयूटर भी सीख ले, इससे अच्छी जॉब मिल सकती है।
रियली, तू सही कह रहा है लेकिन कम्पयूटर की फीस कितनी होगी।
बस तीन सौ रूपये प्रति माह।
अरे वाह, तब मै भी कम्पयूटर सीख सकता हॅू, राहुल मै कल तेरे घर पर आ जाउंगा वही से दोनो कोचिंग चलेगे।
ठीक है, कल तेरा इंतजार करूंगा।
ओ.के. बाय।
राज नहा धोकर ठीक समय पर तैयार होकर राहुल के घर पहुॅचता है और दोनो कम्पयूटर कोचिंग के लिये निकल जाते है।
राज कम्पयूटर क्लासेस मे दाखिला ले लेता है। फिर ध्यान से कम्पयूटर सिखता है उसको पढ़ाने वाली टीचर भी उससे प्रभावित हुए बिना ना रह सकी क्योकि वह सारा प्रैक्टीकल और थ्योरीकल सब कुछ बहुत जल्दी समझ जाता था। उसे दुबारा समझाने की जरूरत नही पड़ती थी। इसी तरह होटल मे काम करते हुऐ राज ने कम्पयूटर का सारा काम सीख लिया। अब वो सेाचने लगा कि मुझे कम्पयूटर की जॉब करनी चाहिए यह सोचकर वह अपने दोस्त के पास आया और अपनी समस्या बताई। उसने उसे अपने एक जानकार के आफिस पर चपरासी के पद पर दो हजार रूपये प्रति माह रखवा दिया और कहा, यहॉ पर कम्पयूटर मे काम कैसे करते है यह सीख लो फिर तुम्हे दूसरी जगह लगवा देगे। वह खाली टाईम मे कम्पयूटर पर बैठ जाता था और कम्पयूटर मे दिमाग मारता रहता था और यह सोचता रहा कि चलो होटल से अच्छा काम है। अपनी मेहनत और दिमाग के बलबुते से राज आपिफस मे चपरासी से कम्पयूटर आपरेटर बन गया और उसकी जगह पर दूसरा लड़का रख लिया गया। इसी तरह मेहनत करते हुऐ अब वो एक संस्था मे आफिस र्क्लक बन गया। अब उसकी वर्षो पुराने सपने को साकार करने की सोची जो था अपना बिजनिस करना। उसके लिये उसने सारी जानकारी प्राप्त की और अपनी फाईल सरकारी कार्यालय मे जमा कर दी। जिस कार्यालय मे राज ने फाईल जमा की थी उस कार्यालय मे अधिकारी राज को उसकी संस्था के माध्यम से जानता था तो राज ने सोचा चलो यहॉ पर कुछ सहायता और मार्गदर्शन मिल जायेगा।
एक दिन राज अपने फाईल के बारे मे पता करने के उददेश्य से सरकारी कार्यालय गया तो वहा के अधिकारी से मिला।
सर, नमस्कार।
हॉ, बताओ राज कैसे आना हुआ।
सर, मैने कुछ दिन पहले आपके वहा एक फाईल दी थी उसके बारे मे जानकारी चाहिए थी।
तू एक गरीब आदमी है और तेरा बाप भी नही है तू कहॉ इन चक्करो मे पड रहा है। दो हजार रूपये की नौकरी करने वाला इतने बडे सपने देख रहा है। अपनी औकत मे रहकर ही कोई काम करना चाहिए। तेरे पास कोई पहुंच भी नही है। वैसे भी बिना रिश्वत के कोई काम नही होता। सारा समय बरबाद कर दिया।
राज अधिकारी के यह शब्द सुनकर भौचक्का रह गया और राज को काटो तो खून नही!
आज ऐसा लग रहा था किसी ने राज के चेहरे से उसका आत्मविश्वास और चेहरे से हंसी ही छीन ली।

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