November 29, 2010

बाबा की माया

अरे ओ बचवा हमको तनिक दान दई दो, हम तुम्हरा सारा कष्टवा दूर कर दईगे।
बाबा, आप का लेईगंे।
अरे बचुआ हमका पहिले भोजन कराई दो वा के बाद दान दक्षिणा लईगें।
जी बाबा, विनोद ने कहा।
अरे बचुआ तनिक निकट आवो हम तुम्हरा सारा कष्टवा दूरकर राख कर देईत है।
विनोद नजदीक जाता है, बाबा दो तीन बार उसके सिर पर हाथ फिराकर..
अरे बचुआ तुम्हरे उपरवा तो बहुत कष्टवा है वा मे से तनिक कष्टवा भश्म कर राख कर दिया हॅू। या को अपने हाथ से गंगा मे बहाई देईना।
परन्तु बाबा, हमरी तो इतनी हैसियत नाही है कि हम गंगा जाकरवा नहाई ले।
हमरे रहते काहे चिन्तन करता है बचुआ, हमका मात्रा पॉच सौ रूपया और कुछ अनाज देई दो और हम गंगा मां के दर्शनवा खातिर जाई रहे है। यो कार्य हम तुम्हरे नाम से करवाई देईगे।
रेखा, कितनी देर मा भोजनवा बन जाईगा।
थोड़ी देर रूको बस लाई रहे है हम।
खाना बाबा के सामने रख दिया जाता है।
बाबा भोजन करई लो।
अच्छा बचुआ!
भोजन करने के बाद बाबा अपनी राह चल देता है।
रेखा! बाबा जी हमरी सारी मुसिबतो को भश्म दिये है।
हॉ! ठीक कह रहे हो आप।
तभी सामने से एक लड़का भागता हुआ आता है और विनोद से कहता है।
अरे भाई! तुम्हारे यहा एक बाबा आये थे क्या।
हॉ आये तो थे का बात है।
अरे! वो कोई बाबा नही ढोगी है।
अरे काहे हमरे बाबा कु ढ़ोगी कह राहे हो, वो हमरे सारे कष्ट भश्म कर दिये है। तुम उनका ढ़ोगी बताये रहे हो।
उसने कैसे तुम्हारे कष्ट दूर किये।
बाबा ने हमरे सिर पर हाथ घुमाई के पिफर हमरे सारे कष्ट राख मा बदल गये।
क्या उसने ऐसे किया था।
अरे! तुम भी बाबा का चम्तकार जानत हो।
भईया ये कोई चम्तकार नही हाथ की सफाई और विज्ञान है।
यू कैईसे हो गया।
देखिये यह सब पहले से तैयार करना पड़ता है। पहले राख को साफ करके उसको चावल के माढ़ मे मिलाकर उसकी गोली बनाकर हाथ मे इस तरह छुपाई जाती है कि सामने वाले को दिखाई ना दे और उसके सिर से दो बार घुमाकर गोली को पीस दिया जाता है फिर उसके हाथ मे दे कर कहा जाता है कि ये तेरा भूत था या तेरे सारे कष्ट दूर कर दिये। समझे बर्खुददार।
लेकिन आप कहॉ से है कौन है जो आपको ये सब पता है?
मेरा नाम राजेन्द्र सिंह नेगी है मै प्रगति विज्ञान संस्था का कार्यकर्ता हूॅ, हम और हमारी संस्था समाज को विज्ञान के प्रति जागरूक करने के लिये गॉव, देहात और शहरो मे विज्ञान जागरूकता से सम्बन्धित कार्यक्रमो का आयोजन करते रहते है। जिससे आप जैसे लोग आज बेवकूफ बन गये इस तरह से दुबारा ना बने।
आपका बहुत-बहुत धन्यवाद! हमका और हमरी बीबी आपकी आभारी रहेगी। आप हमरा आखे खोल दिये हो। अब हम किसी के चक्कर मे नाही पड़ेगे। आप अगले बार हमरे गॉव मा भी एक कार्यकरम रखना क्यूकि हम गांव वाले भी इन ढ़ोगियो से बच साके।
और फिर उस लड़के ने विस्तार से अन्य चम्तकारो के बारे मे भी बताया लेकिन वह ढ़ोगी तो भाग गया जिसका पीछा करते हुऐ यहां तक आया था। चलो कोई बात नही इन गांव वालो का अंधविश्वास तो कम हुआ यह सोचते हुऐ वह लड़का गांव की नजरो से ओझल हो गया अपने आगे के मिशन के लिये।

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